UPSC Full Form ( UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION ) CSE (संघ लोक सेवा आयोग) - Hindi Me Help | Online Internet ki Puri Jankari Hindi !

Saturday, December 19, 2020

UPSC Full Form ( UNION PUBLIC SERVICE COMMISSION ) CSE (संघ लोक सेवा आयोग)

 UPSC full form/का UPSC का फुलफॉर्म/UPSC का हिंदी अर्थ/मतलब/मीनिंग:- 

UPSC का फुलफॉर्म यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन होता है जिसका हिंदी अर्थ संघ लोक सेवा आयोग होता है!  

Upsc fullform is Union public service commission


UPSC की परीक्षा को हम सीएसई (cse) के नाम से भी जानते हैं जिसका अर्थ है सिविल सर्विस एग्जाम।

UPSC Full Form

UPSC का इतिहास/UPSC History&Installation(के बारे में):- 

यह सिर्फ भारत की ही नहीं बल्कि पूरे एशिया महाद्वीप की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक है जिसकी स्थापना १ अक्टूबर सन् १९२८(1october since 1928) में किया गया था बाद में नव भारत के संविधान द्वारा एक विशेष संबेधानिक नियम परिता किया गया था। जिसके माध्यम से भारत सरकार लोक सेवा आयोग के पदाधिकारियों को चयनित करता है।

Upsc के प्रारंभिक समय में परीक्षा इंग्लैंड देश में हुआ करती थी लेकिन जब भारत स्वतंत्र के काफी करीब था तो राष्ट्रवादियों ने इस विषय पर चर्चा की और राष्ट्रवादियों की बात को रखने का आग्रह किया वो था की अब संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की परीक्षा भारत में ही की जाएगी । प्रथम लोक सेवा आयोग की स्थापना लगभग १९२६ को की गई थी तत्पश्चात् देश के स्वतंत्र होने पर इसे निश्चित रूप से २६ अक्टूबर सन् १९५० (26 october since 1950) में स्थापित कर दिया। 



इस आर्टिकल के माध्यम से हम निम्न बातों को जानेंगे/upsc की संपूर्ण जानकारी:- 


Upsc की तैयारी,UPSC preparation

सिविल सेवा परीक्षा के लिए न्यूनतम-अधिकतम निर्धारित आयु सीमा age limitation

Upsc का सिलेबस विस्तार में upsc syllabus explained

Ncert का योगदान और इसे पढ़ने का सही तरीका how to read ncert, best way

कैसे करे ऑप्शनल(ootional) सब्जेक्ट/विषय का चयन, विकल्पिक विषय का चयन।

कैसे भरे upsc का परीक्षा फॉर्म, फार्म भरने का सही तरीका, how to fill upsc exam form

Upsc में उत्तर लेखन का महत्व और अच्छा उत्तर लेखन कैसे करें importance of writing skills for UPSC

Upsc परीक्षा पैटर्न upsc exam pattern

यूपीएससी का रिजल्ट और चयन discussion:about upsc results and passing rank

Upsc की ब्रांचे branches/services of UPSC 

चयनित अभ्यर्थियों के अनुभव और विचार experience and tips

मौखिक परीक्षा की तैयारी upsc interview

मौखिक परीक्षा में ध्यान रखने योग्य बातें interview tips

आपके योग्य upsc ब्रांच/सर्विस का चयन selection of IAS/IPS/IFS/IRS according to your personality and needs

सिविल सेवा के पदों का कार्य के आधार पर वर्गीकरण upsc post division 

आईएएस/आईपीएस/आईएफएस/आईआरएस आदि सर्विस की सैलरी और सुविधाएं IAS,IPS,IFS,IRS etc salary and perks


आईएएस/आईपीएस/आईएफएस/आईआरएस आदि सेवाओं में सबसे ज्यादा शक्तिशाली कौन who's the powerful in civil service, IAS/IPS/IFS/IRS etc.


यूपीएससी में सेवाओं के अनुसार भाषा पर विचार importance of languages for upsc


Upsc की सेवाओं का सबसे बड़ा पद के आधार पर वर्गीकरण lower and higher post of upsc

Upsc से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

Other information about upsc,civil service examination(cse)



(1)upsc की तैयारी/UPSC preparation,cse// civil service exam preparation:- 

 Upsc भारत सरकार द्वारा किसी यूजी(UG) और पीजी(PG) एंट्रेंस एग्जाम के लिए कंडक्ट नहीं कराई जाती बल्कि upsc के माध्यम से संघ आयोग/जन सेवा के लिए चयन किया जाता है. upsce की परीक्षा की तैयारी यूजी के बाद अथवा यूजी के साथ की जाती है यहां पर यूजी शब्द का मतलब स्नातक की डिग्री से है।

 अगर आपके पास स्नातक डिग्री है तभी आप इस परीक्षा में बैठने के लायक है अन्यथा नहीं। इसलिए यह निर्भर करता है कि छात्र स्नातक की पढ़ाई के साथ upsc की तैयारी करे या स्नातक की पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद, छात्र स्नातक की पढ़ाई के साथ भी upsc के सिलेबस को कवर करने में अथवा upsc के सिलेबस हो कुछ हद तक पूरा करने में सक्षम है तो इसकी की तैयारी स्नातक की पढ़ाई के साथ कर देनी चाहिए क्योंकि upsc वो परीक्षा है जिसमें स्नातक अथवा हाई स्कूल डिग्री व मार्कशीट की परसेंटेज को ध्यान में नहीं रखा जाता अगर आप स्नातक में विशेष अंक भी हासिल नहीं कर पाते तब भी upsc से संबंधित कोई समस्या नहीं आती।

Upsc का मक़सद उन छात्रों को चुनना है जो सामाजिक आर्थिक से जुड़े हो जो अच्छा और दृढ़ संकल्प, फ़ैसला ले सके,जो उसके काबिल हो नाकि सिर्फ़ पढ़ने वाले छात्रों को।

स्नातक डिग्री के साथ upsc की किसी संस्थान को चुनना अथवा किसी संस्थान में कोचिंग (upsc coaching)के रूप में पढ़ाई करना काफी मुश्किल हो जाता है कोई छात्र स्नातक की पढ़ाई के साथ upsc संस्थान को भी ज्वाइन कर लेता है तो वह कहीं ना कहीं इसके  सम्पूर्ण सिलेबस को कवर करने में कोई न कोई कसर छोड़ देता है इसलिए जहां तक संभव हो स्नातक की पढ़ाई के साथ सेल्फ स्टडी(self study),स्वयं/खुद से तैयारी करनी चाहिए तथा स्नातक हो जाने के बाद संस्थान में दाखिला ले सकते हैं जहां तक संभव हो तो आप स्नातक(graduation) की पढ़ाई के साथ भी upsc संस्थान में दाखिला ले सकते हैं यह पूरी तरह से निर्भर करता है कि आप किस दिशा में, किस सब्जेक्ट में स्नातक कर रहे हैं अगर आप किसी सरल सब्जेक्ट सरल डिग्री का चयन करते हैं तो आसानी से upsc संस्थान में एडमिशन ले सकते हैं और अपनी पढ़ाई को जारी रख सकते हैं।


(2) upsc सिविल सेवा परीक्षा के लिए न्यूनतम-अधिकतम निर्धारित आयु सीमा upsc number of attempts/age limitation:-


सिविल सेवा के लिए upsc और भारत सरकार द्वारा न्यूनतम निर्धारित आयु सीमा 21 वर्ष है तथा अधिकतम निर्धारित आयु सीमा 32 वर्ष है।

यहां पर अलग-अलग जाति को आयु में कुछ छूट भी प्रदान कराई जाती है-

एससी/एसटी(sc/st वर्ग के की जाति को 5 वर्ष की अधिकतम छूट प्रदान कराई जाती है तथा 6 अटेम्प्ट दिए जाते है।

ओबीसी(obc) अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग की जाति के लिए 3 वर्ष की अतिरिक्त छूट प्रदान कराई जाती है तथा ओबीसी के लिए 9 अटेम्प्ट दिए जाते है।


सैनिक अथवा विकलांग छात्रों के लिए 3 वर्ष की अतिरिक्त छूट प्रदान कराई जाती है sc/st, total number of attempts is 9 


दृष्टिहीन छात्र/छात्रा, न सुनने वाले/पीडब्ल्यूडी (pwd)या किसी अन्य सुनिश्चित की गई परिस्थिति के विक्टिम को अधिकतम 10 वर्ष की छूट प्रदान कराई जाती है। No limit of attempts 





(3)upsc का सिलेबस विस्तार में (upsc syllabus explained):-


 Upsc का प्री सिलेबस/प्रारंभिक परीक्षा,मैंस सिलेबस/मुख्य परीक्षा तथा इंटरव्यू के अनुसार अलग अलग रखा गया है तथा प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा  का सिलेबस एक साथ जोड़ा गया है  इंटरव्यू एक ऐसा मौखिक परीक्षा है जिसमें सिलेबस की कोई सीमा नहीं होती अतः यह पूर्ण रूप से विद्यर्थियों के विचार सोच और मनोविज्ञान पर निर्भर करता है। 

 सिलेबस को हम पूरी तरह से विस्तार में समझेंगे तथा इसे हमने सुविधा के अनुसार दो मुख्य भागों में बांटा है पहला स्थाई सिलेबस, स्थाई सिलेबस upsc द्वारा जारी किया गया कार्य है और अस्थाई सिलेबस डेली रूटीन अथवा बढ़ते समाज के साथ समाज की कार्यविधि जानकारी देश प्रदेश की जानकारी आदि आते हैं। स्थाई सिलेबस को शुरू से लेकर अंत तक जारी रखना होता है तथा अस्थाई को आप अपने अनुसार किसी भी माध्यम से कर सकते हैं और ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटा सकते हैं।


आपकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए हमने सिलेबस के साथ उनकी सामग्री को भी जोड़ने की कोशिश की है, जिससे आपको इसे समझने में आसानी होगी।


अस्थाई सिलेबस temporary syllabus



नंबर 1 रखा है किसी भी राष्ट्रीय स्तर का अखबार हो(news and newspapers)- जैसे दैनिक भास्कर, पत्रिका, नेशनल एडिशन या अन्य किसी प्रकार का राष्ट्रीय स्तर का अखबार हो जो समस्त राष्ट्र से संबंधित चल रही चर्चा को विस्तार रूप से आप तक पहुंचा सके।


दूसरे नंबर पर हमने रखा है अर्थव्यवस्था अथवा इकोनॉमिक्स से संबंधित कोई भी अखबार(economical news updates)- business gyan, business standard आदि मुख्य अखबार से इस विषय के बारे में जानकारी एकत्रित कर सकते हैं इन्हें आप अपनी सुविधा के अनुसार व आपकी भाषा के अनुसार किसी भी नाम के अर्थव्यवस्था से संबंधित अखबार को डेली रूटीन पर पढ़ सकते हैं।


फिर आती है पत्रिकाएं जिसे हम मैगजीन कहते हैं (magazines)- यह मैगजीन upsc द्वारा ऑफिशियल निकाली गई हो या किसी अन्य संस्थान से निकाली गई हो आप किसी को भी पढ़ सकते हैं कुछ सिविल सर्विस कनिका, योजना कुरुक्षेत्र आदि मुख्य मैगजींस है या पत्रिकाएं है।


नेशनल रेडियो समाचार या विशेष क्षेत्र के लिए इंटरनेशनल रेडियो समाचार को भी अपना सकते हैं जैसे रेडियो एयर न्यूज़, भारतीय रेडियो न्यूज़, दूरदर्शन समाचार, करंट अफेयर्सcurrent affairs से संबंधित अन्य टॉपिक आदि।


आपके द्वारा चुना गया वैकल्पिक विषय/ऑप्शनल सब्जेक्ट(optional subject) से जुड़ी हुई पत्रिकाएं भी जरूर रूप से शामिल किया जाना चाहिए।



स्थाई सिलेबस permanent syllabus



भूगोल (Geography)

ज्योग्राफी अथवा भूगोल विषय का सिलेबस कवर करने के लिए कक्षा 6 से लेकर के कक्षा 12वीं तक की गवर्नमेंट द्वारा सर्टिफाइड ncert बुक्स अनिवार्य रूप से पढ़ना और नई ncert किताबों के साथ पुरानी एनसीआरटी किताबों को भी देखना और उनके बदलाव को बारीकी से समझना आदि भूगोल विषय का बेसिक नॉलेज इन किताबों के जरिए प्राप्त कर सकते हैं तथा भूगोल से संबंधित upsc के लिए अन्य किताबें भी आवश्यक होती हैं लेकिन उससे पहले आपको 6 से कक्षा बारहवीं तक की सभी एनसीआरटी(ncert books) की किताबों को अच्छी तरह से समझने के बाद ही उपयोग में लाना चाहिए।

अन्य किताबें-  भारत का भूगोल जियोग्राफी ऑफ इंडिया(geography of India) आदि कोई और भी किताब को शामिल कर सकते हैं, world geography


राजनीति विज्ञान (political science)

राजनीति विज्ञान को पॉलिटिकल साइंस बोलते हैं। इसका बेसिक सिलेबस कक्षा 6 से लेकर के 12 तक की सभी एनसीआरटी किताबें।


जिसमें कुछ महत्वपूर्ण टॉपिक हैं जिन पर विशेष ध्यान देना चाहिए जैसे कि-

 "सामाजिक एवं राजनीतिक विज्ञान सोशल एवं पॉलीटिकल लाइफ" को आप कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा 8वी ncert किताबों से कर सकते हैं।

 -लोकतांत्रिक राजनीति कक्षा 10 की किताब के जरिए कर सकते हैं।

- "राजनीति परिचय  या भारत का संविधान के सिद्धांत" कक्षा 11 वीं की एनसीईआरटी बुक में विस्तारित रूप से की गई है।

- "स्वतंत्र भारत में राजनीति/पॉलिटिक्स इन इंडिया सिंस इंडिपेंडेंस" और  "समकालीन विश्व राजनीति वर्ल्ड पॉलिटिक्स" कक्षा 12 वीं की एनसीईआरटी बुक के द्वारा कर सकते हैं।


-राजनीतिक विज्ञान से संबंधित अन्य जानकारी जैसे चयनित छात्रों द्वारा सुझाव दिया गया है कि भारत की राजव्यवस्था/इंडियन पॉलिटिक्स नामक पुस्तक जिसे लक्ष्मीकांत जी ने लिखा है, इस पुस्तक का काफी योगदान है। हमारी राय भी यही होगी कि आप भी लक्ष्मीकांत जी की किताब को अवश्य शामिल करें।

- दूसरी किताब, "21वीं सदी में अंतरराष्ट्रीय संबंध/इंटरनेशनल रिलेशन इन फर्स्ट सेंचुरी" नामक किताब को पुष्पेश पंत जी ने लिखा है इसे भी आप राजनीति विज्ञान में शामिल कर सकते हैं जिससे कि आप की राजनीतिक विज्ञान काफी मजबूत होगी।


अर्थशास्त्र (economics)

बढ़ते हैं तीसरे सब्जेक्ट पर जिसका नाम है इकोनॉमिक्स या अर्थशास्त्र।

अर्थशास्त्र के बेसिक को पूरा करने के लिए अथवा अर्थशास्त्र की बेसिक जानकारी को कंप्लीट करने के लिए कक्षा 9 वीं (class 9th to class 10th ncert books)एनसीईआरटी किताब के साथ कक्षा दसवीं की एनसीईआरटी किताब यह आर्थिक विकास की समाज के लिए बहुत अच्छा रोल निभाती है।

-"भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास इंडियन इकोनामिक डेवलपमेंट(Indian economic development)" को कक्षा 11वीं की इकोनॉमिक्स एनसीआरटी किताब के जरिए पूरा किया जा सकता है!

" समष्टि अर्थव्यवस्था एक परिचय/इंट्रोडक्टरी माइक्रोइकोनॉमिक्स(introductory microeconomics) और वेस्टी अर्थशास्त्र एक परिचय इंट्रोडक्टरी माइक्रोइकोनॉमिक्स" कक्षा 11वीं और कक्षा 12वीं की अर्थशास्त्र एनसीईआरटी की किताबों के जरिए पूरा किया जा सकता है।

- कक्षा ग्यारहवीं की एनसीआरटी उपयोग कर सकते हैं अगर आप चाहें तो इस किताब को शामिल भी ना करें तब भी आपको कोई परेशानी नहीं होगी।


- अर्थशास्त्र से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण किताब जिसका नाम है "भारतीय अर्थव्यवस्था इंडियन इकोनामी(Indian economy)" और इसे लिखा था श्री रमेश सिंह जी ने, इसको आप एनसीईआरटी की समस्त किताबें पढ़ने के बाद अथवा अर्थशास्त्र का बेसिक ज्ञान सामान्य ज्ञान पूरा करने के बाद ही पढ़ें।


इतिहास (History)

अगला सब्जेक्ट/विषय है इतिहास (हिस्ट्री), इतिहास का बेसिक या सामान्य ज्ञान पाने के लिए कक्षा 9वी से कक्षा 12वीं तक की समस्त ncert किताबों को पढ़ना अनिवार्य है जैसे कि भारत एवं समकालीन विश्व युद्ध पहला दूसरा आदि टॉपिक को कक्षा 9वी से कक्षा दसवीं तक की किताबों के द्वारा पूरा कर सकते हैं।


विश्व इतिहास के कुछ नियम (थीम्स इन वर्ल्ड हिस्ट्री/themes in world war) यह टॉपिक कक्षा ग्यारहवीं से कंप्लीट किया जा सकता है। इसके बाद भारतीय इतिहास के कुछ इसकी लगभग 3 भाग होते है जो अलग-अलग भाग में विभाजित की गई है 1,2, एवं 3 भाग।


Upsc के लिए इतिहास विषय से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी को भी पढ़ना अनिवार्य है जैसे कि आजादी के बाद के स्त्री के ऊपर किसी भी किताब को शामिल कर सकते हैं और दूसरा फ्रीडम मूवमेंट (freedom movement) नामक किताब को भी शामिल कर सकते हैं जिसे बिपिन चंद्र जी ने लिखा है

 याद रहे कि इन सब books को हिस्ट्री का सामान्य ज्ञान पूरा हो जाने के बाद ही पढ़ना शुरू करना चाहिए जैसे कि हिस्ट्री से संबंधित कक्षा नौवीं से 12वीं तक की समस्त एनसीईआरटी किताबों को पढ़ना।


इसके साथ ही कुछ अन्य सब्जेक्ट के पद्यों को भी पढ़ना अनिवार्य है जिसे हमने नीचे निम्नलिखित सूचीबद्ध किया है


पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (एंविरोमेंट एवं इकोलॉजी/environment and ecology)

 भारतीय कला एवं संस्कृति (इंडियन आर्ट एवं कल्चर/Indian art and culture)

 भारत की आंतरिक सुरक्षा (चैलेंज  इंटरनल सिक्योरिटी ऑफ इंडिया/challenges internal security of India)

 एथिक्स इंटीग्रिटी एंड एप्टीट्यूड/ethics integrity and aptitude (नीतिशास्त्र सत्यनिष्ठा और अभिरुचि)

 निबंध से संबंधित कुछ बुक्स जैसे- निबंध बोध ए बुक ऑफ एस ए सीसैट,(CSAT essay book) 

सामान्य अध्ययन (जनरल स्टडीज/general studies) और हर साल की आर्थिक सर्वेक्षण वाली रिपोर्टों को भी पढ़ना अनिवार्य है जैसे कि सोशल वेलफेयर(social welfare) वाला कोई भी पाठ और आप जिस भाषा से यूपीएससी को चुना है उस भाषा का विशेष ज्ञान के लिए लैंग्वेज पुस्तक(language book), जैसे हिंदी से तैयारी करने वाले छात्रों के लिए सही हिंदी एवं सुंदर हिंदी पाठन और लेखन के लिए पढ़ सकते हैं।



सामान्य अध्ययन- एक, सामान्य अध्ययन- भाग दो, सामान्य अध्ययन- भाग तीन एवं सामान्य अध्ययन भाग 4 के आधार पर विस्तारित सिलेबस// General studies part-1,2,3&4


सामान्य अध्ययन पहला (general studies 1st)


इसका मुख्य टॉपिक इंडियन हेरीटेज एंड कल्चर(Indian heritage and culture) और हिस्ट्री ऑफ जियोग्राफी ऑफ द वर्ल्ड एंड सोसाइटी(history of geography of the world society) है इसमें दो अलग-2 खंड आते हैं।

 पहला खंड इंडियन हेरीटेज एंड कल्चर( Indian heritage and culture) और दूसरा हिस्ट्री(history), मुख्य रूप से इंडियन हिस्ट्री(Indian history) की चर्चा की गई है जिसमें प्राचीन भारत और मध्य भारत की गतिविधियां कार्य और उससे संबंधित अन्य नियम आदि।

 और दूसरा है कला एवं संस्कृति कला(art and culture) एवं संस्कृति में-सिंधु सभ्यता, वैदिक साहित्य दर्शन, सामाजिक सुधार आदि सम्मिलित हैं और दूसरा कला रूपों की महत्वपूर्ण विशेषताएं ध्यान देना विशेष है। इसमें गायन/संगीत स्थापना कला, भवन निर्माण, मूर्तिकला, चित्रकला,

 दूसरे भाग में भारत के आजादी के बाद भारत का निर्माण और भारत से जुड़े किस्से जैसे राज्यों का विलीनीकरण, राज्यों का पुनर्गठन और 1965 से 1977 के बीच हुआ युद्ध आदि की जानकारी सम्मिलित है।

 इंडियन हिस्ट्री अथवा भारतीय इतिहास के अलावा विश्व इतिहास जिसे वर्ल्ड हिस्ट्री कहते हैं, को भी रखा गया है इसकी शुरुआत से लेकर के पूरी बातों पर विशेष चर्चा की गई है जैसे अमेरिका की आजादी, प्रथम विश्व युद्ध, दूसरा विश्व युद्ध, उपनिवेशवाद समाप्त कब हुआ आदि मुख्य हैं।


इसी का तीसरा पार्ट है जो ज्योग्राफी ऑफ द वर्ल्ड सोसाइटी

 इसमें भूगोल के मूलभूत सिद्धांत जैसे सौरमंडल का निर्माण कब और कैसे हुआ, अक्षांश एवं देशांतर रेखाएं, सौर  आकाशगंगा आदि के बारे में चर्चा और इसका ज्ञान। देशांतर रेखाएं, जलवायु निर्माण और जलवायु का वर्गीकरण, विश्व में जलवायु, भारत में जलवायु, तापमान, वायु, जल, नदियां, महासागर, प्राकृतिक आपदाएं आदि सम्मिलित हैं।


भूगोल के मूलभूत सिद्धांत में सौरमंडल का परिचय पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे हुई व साथ ही प्रवाह प्लेट विवर्तनिक नक्शे की अच्छी जानकारी होनी चाहिए

 जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक (सोर्स) जैसे तापमान, अक्षांश रेखा देशांतर, वायुदाब, कोहरा, वनों के प्रकार, समुद्र और उसका जलवायु पर प्रभाव, महासागर समुद्री धाराएं, चक्रवात, चट्टानों के प्रकार, परिवर्तन के कारक जैसे भूकंप ज्वालामुखी,सुनामी आदि प्राकृतिक आपदाओं पर भी गहराई से विचार करना 


विश्व का भूगोल(world geography) जैसे कि विश्व के जलवायु का विभाजन, जलवायु का प्रकार, जलवायु से जुड़ी आपदाएं, जलवायु बदलने के कारक, जलवायु को असर करने पर वानस्पतिक योगदान और उसकी विशेषताएं, वनस्पति की जलवायु के आधार पर विश्व में कृषि, कृषि से जुड़ी समस्त प्रकार की जानकारी जैसे कि कृषि की शुरुआत, कृषि में उन्नति, कृषि बढ़ोतरी करने वाले कारक, कृषि में परेशानियों को प्रकट करने वाले कारक, जनसंख्या की दृष्टि से कृषि में बुरा असर, विश्व में खनिज, विश्व में महापूर्ण उद्योग जैसे कृषि उद्योग या अन्य उद्योग आदि।


भारत का भूगोल(Indian geography) जैसे भारत का भौगोलिक विभाजन, भारत की मिट्टियां, मिट्टियों के प्रकार, स्थान के आधार पर मिट्टियों का विभाजन, मिट्टियों की उत्पादकता, फसल सिंचाई के साधन, भारत का प्रवाह तंत्र, प्रभावित खनिज के संसाधन, उद्योग, परिवहन, प्रमाणित डेमोक्रेसी (जननांग) की आदि।



इसका अन्य खंड भारत के भूगोल और उनका मूलभूत सिद्धांत के बारे में है-

तीसरे खंड में संसाधन को रखा गया है जिसमें भारत के संसाधन जैसे कृषि व्यवस्था मिट्टी के प्रकार उद्योग खनिज पदार्थ आदि

समाज (सोसाइटी) की गहराई से परख जैसे कि सोसाइटी से जुड़ी कौन-कौन सी विधाएं हैं, जनसंख्या, गरीबी, ग्रामीण और शहरी समस्याओं, शहरी करण आदि का प्रभाव और इन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य 


सामान्य अध्ययन दूसरा( general studies-2)


राजनीतिक शास्त्र राज्य व्यवस्था से जुड़ी जानकारी- जैसे कि राज्य क्या होता है, संविधान क्या होता है, सरकार और प्रशासन कैसे कार्य करते हैं, कार्य करने के नियम और इनकी शुरुआत तथा गठन लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ क्या होता है, लोकतंत्र में चुनाव क्या होते हैं, चुनाव की जानकारी राज्य एवं केंद्र सरकार में चुनाव में परिवर्तन और नियम, उद्देशिका मैं समानता, स्वतंत्रता, न्याय और धर्मनिरपेक्षता का क्या अर्थ है, राजनीतिक दलों के प्रकार के सिद्धांत क्या होते हैं, सरकार की योजनाएं कौन-कौन सी हैं निर्माण एवं संगठन कैसे और कब हुआ और कैसे हुआ, अधिकार किसे कहते हैं, राष्ट्रवाद क्या होता है, विकास किसे कहते हैं आदि।

 

इन सभी पर  मूल रूप से चर्चा और जानकारी-


संविधान (कॉन्स्टिट्यूशन/constitution) - संविधान और संविधान से जुड़ी विशेषताएं जैसे विधायिका, कार्यप्रणाली, न्यायपालिका और समस्त संविधान।

 संगठन- जैसे कि संवैधानिक संगठन, संवेधनिक संगठन


शासन या गवर्नेंस(governance) - जैसे कि सिविल सोसायटी(civil society) और चरित्र तथा विशेषताएं जिसमें सामान्य और विशेषज्ञ क्या होते हैं, प्रतिवाद, लोक सेवा क्या है, नौकरशाही और जन राजनीति के संबंध (मंत्री और सचिव के संबंध) आदि

 राष्ट्रीय एकता में योगदान, प्रशासन और संस्कृति का संबंध और इसी में आता है सिविल सर्विसेज की समस्याएं एवं इसकी चुनौतियां जैसे भ्रष्टाचार जैसी समस्या और कार्यप्रणाली की समस्या।


सामाजिक न्याय/सोशल जस्टिस/social justice - वेलफेयर या किसी अन्य संबंध से जुड़ी सरकार की समस्त प्रकार की योजनाएं


अंतरराष्ट्रीय संबंध(international relationship)- भारत की विदेश नीति से संबंधित समस्त प्रकार की जानकारी और इसका इतिहास, भारत के पड़ोसी देश सभी पड़ोसी देशों की जानकारी महत्वपूर्ण संगठन जिसमें भारत के मुख्य कार्य और उनके नियम आदि।

 अफ्रीकी देश और लेटिन अमेरिकन देशों के साथ भारत के संबंध और इनके बारे में चर्चा, बड़ी शक्तियों के साथ भारत के संबंध अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय, जर्मनी आदि के बारे में इससे संबंधित जानकारी।


विश्व के महत्वपूर्ण संगठन- वर्ल्ड बैंक वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन यूनाइटेड नेशन ऑर्गेनाइजेशन(world bank,world trade organisation, United Nation organisation) आदि

विश्व की समस्याएं और उसमें भारत की भूमिका, भारत का योगदान जैसे कि आतंकवाद, पर्यावरण परमाणु, अस्त्र मानवाधिकार, विश्व की शांति आदि जैसी समस्याएं।


सामान्य अध्ययन तीसरा( general studies-3rd)


प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी/technology) और सामान्य विज्ञान(general science)- विज्ञान और टेक्नोलॉजी(science and technology), टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत की क्या उपलब्धियां क्या रही हैं, इनका क्या योगदान तथा वर्तमान में इनकी स्थिति, विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत ने कौन-कौन सी स्वदेशी तकनीकी अपनाई है और विकसित की हैं आदि की जानकारी।

नई तकनीकी कौन-कौन सी आ रही हैं उनके बारे में वर्णन और उनकी जानकारी


- इंफॉर्मेशन और टेक्नोलॉजी/information and technology- जैसे कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां क्या कह रही हैं, कंप्यूटर के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां इसके कार्य विकास और इसका महत्व, रोबोट के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां और उनका महत्व, टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में, बायो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में


- बौद्धिक संपदा अधिकार क्या है, कब लागू किया गया था और इसके क्या क्या चुनौतियां हैं!


-राष्ट्र के संबंधित जानकारी जैसे जीडीपी की जानकारी, समस्त क्षेत्र में जीडीपी का योगदान, बजट कैसे तैयार किया जाता है, मौखिक प्रणाली और इसमें रिजर्व बैंक की भूमिका, मुद्रा स्थिति, मुद्रा स्फीति, उत्पादन के मुख्य कार्य क्या होते हैं, बाजार किसे कहते हैं,वस्तु के मूलभूत सिद्धांत, मूल निर्माण निर्धारण कैसे होता है, मांग एवं पूर्ति का सिद्धांत क्या है और अर्थ क्या है, व्यवस्था क्या है, भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप क्या है, आर्थिक विकास किसे कहते हैं ।


सामान्य अध्ययन का अन्य भाग में हमने आर्थिक विकास(economic development) को रखा है-


आर्थिक विकास(economic development)- भारत भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि की क्या भूमिका है? वर्तमान में कृषि की क्या स्थिति है भारतीय औद्योगिक परिदृश्य क्या है? सर्विस फैक्टर क्या होते हैं? अर्थव्यवस्था के लिए सरकार की नदियां एवं उनकी योजना क्या है? भारतीय बैंकिंग व्यवस्था कैसी है? भारतीय शेयर मार्केट की स्थिति और इसकी जानकारी, भारत का विश्व व्यापार में क्या स्थान है, रोजगार सार्वजनिक वितरण प्रणाली क्या है, समावेशी विकास एवं धारणीय विकास क्या होता है, पशुपालन, उद्यानिकी क्या है, भूमि सुधार के बारे में कुछ तथ्य और भूमि सुधार आधारभूत संरचना का विकास, इन्वेस्टमेंट के मॉडल(models of investment and it's system) क्या-क्या होते हैं, नीति आयोग, उदारीकरण, भारतीय बाजार में सुधार आदि की जानकारी।


जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी / biodiversity)- 

पर्यावरण-सामान्य ज्ञान और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, मध्य पूर्व संगठन, पर्यावरण के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण संस्थाओं का निर्माण और प्रयास आदि की जानकारी।


सुरक्षा (सिक्योरिटी/security)- आंतरिक सुरक्षा जैसे आतंकवाद, उग्रवाद, लोकसभा,सीमा की सुरक्षा जैसे समुद्री सुरक्षा, अरब सागर सुरक्षा, बंगाल की खाड़ी की जानकारी इसकी सुरक्षा और महत्व, आसमानी सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, हमारी सुरक्षा को चुनौती देने वाले कारक जैसे कालाधन, हथियारों की तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी आदि, भारत की सुरक्षा एजेंसी जैसे पैरामिलिट्री फोर्स तथा प्रवर्तन निदेशालय आदि


आपदा प्रबंधन !डिजास्टर मैनेजमेंट/disaster management)- आपदा प्रबंध के तत्व कौन कौन से हैं और आपदाएं आने पर उसे किस प्रकार ठीक किया जा सकता है? इसके बारे में स्वयं का अध्ययन/विचार और उपाय।



सामान्य अध्ययन चौथा(general studies-4th)

सामान्य अध्ययन चौथे में हमने upsc के प्रारंभिक परीक्षा(upsc pre-exam) के साथ upsc की सामान्य अध्ययन जनरल स्टडीज 4(GS-4) के सिलेबस को भी कवर किया है।


नीति शास्त्र- जिसका संबंध समाज संस्कृति और संस्थान से होता है


सत्य निष्ठा- जिसका संबंध व्यक्ति के आचरण से होता है


अभिरुचि- जिसका संबंध व्यक्ति के व्यवहार विचार और संस्कार से होता है


  • -सैद्धांतिक पक्ष नीति शास्त्र क्या है
  •  -अभिव्रत्ती क्या है
  •  -इंटेलीजेंट किसे कहते हैं
  • - सिविल सेवा में वैल्यू और एथिक्स की क्या भूमिका है
  • - स्टडी केस (study case)


कुछ शब्द और उनकी परिभाषाएं शास्त्र और ग्रामर:- 


नीचे सूचीबद्ध किए जा रहे शब्दों के बारे में जानना उनके अर्थ और उनकी परिभाषा को समझना आवश्यक है।


  • अध्य व्यवसाय
  • सेवा भाव 
  • प्रतिबद्धता
  •  अंतर आत्मा की पुकार
  •  संतोष 
  • भक्ति
  •  प्रभाव
  •  उपयोगितावाद 
  • ह्रदय 
  • सत्यता
  •  आत्मविश्वास
  •  मनोबल
  •  कुंठा
  •  पाप 
  • पुण्य
  •  क्रोध
  •  उग्र वाद 
  • पाखंड 
  • चेतना
  •  संकट
  •  नैतिक कला
  •  सहानुभूति
  •  सरिता,सहिष्णुता
  •  शांति/ प्रेम/ विश्वास 
  • अध्यात्मिकता
  •  उपवास/बुद्धि/अवचेतन मन
  •  धैर्य 
  • आत्म संयम/ साहस /अहम/ दमन 
  • सृजनात्मकता
  •  इमानदारी 
  • करुणा 
  • संघर्ष
  •  आनंद/श्रद्धा /प्रेरणा 
  • भौतिकता/ आत्मा मान/ चेतन अंता प्रज्ञा
  •  अनुशासन/ उदारता /आत्मसम्मान 
  • निष्काम /कर्म / वासना और चापलूसी आदि 


महापुरुष और नेता:- 

हमारे द्वारा कुछ महत्वपूर्ण  नेता और अन्य महान व्यक्तियों को नीचे सूचीबद्ध किया गया है, जिनके बारे में जानना आवश्यक होता है।


  • सुकरात
  •  प्लेटो 
  • अरस्तु 
  • कौटिल्य
  •  सम्राट अशोक
  •  रूसो 
  • महात्मा गांधी 
  • अरविंद दयानंद सरस्वती 
  • नारायण गुरु 
  • राम मनोहर लोहिया 
  • रविंद्र नाथ टैगोर
  •  एमएन राय 
  • दीनदयाल उपाध्याय 
  • नेल्सन मंडेला 
  • सुभाष चंद्र बोस
  •  मदर टेरेसा 
  • स्वामी विवेकानंद 
  • डॉक्टर भीमराव अंबेडकर 
  • सरदार वल्लभभाई पटेल आदि।



(4)ncert का सिविल सेवा परीक्षा में महत्व और इसे पढ़ने का सही तरीका(How to read ncert books for upsc exam//hand making notes):- 


Ncert का पूरा नाम, ncert फुल फॉर्म//ncert full form- राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान और प्रशिक्षण परिषद (नेशनल काउन्सिल ऑफ एड्युकेशनल रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग//national council of educational research and training)है, जिसे भारत सरकार द्वारा उच्च शिक्षा स्तर को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया था। एनसीईआरटी का किसी भी एंट्रेंस एग्जाम या किसी सरकारी पोस्ट के लिए बहुत बड़ा योगदान है। सामान्य शब्दों में कहा जाए तो एनसीईआरटी की किताबें किसी भी सब्जेक्ट का सामान्य ज्ञान की नींव होती है जिसमें किसी भी सब्जेक्ट का शुरुआती ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है और इसे आसानी से समझा जा सकता है।


Upsc के लिए भी निम्न स्तर से लेकर के उच्च स्तर तक के ज्ञान की आवश्यकता होती है जिसमें की निम्न स्तर अथवा बेसिक ज्ञान को एनसीईआरटी किताब के जरिए पूरा किया जा सकता है। Ncert पुस्तक का चयन करना आवश्यक है क्योंकि जब तक आप ncert को अच्छी तरह से नहीं पढ़ लेते तब तक आप का ज्ञान अधूरा रहता है क्योंकि एनसीईआरटी में दिए गए पद्धों को सरल भाषा में आसानी से समझाया गया है और भारत सरकार द्वारा सफल किए गए सभी तत्वों को भी इसी पुस्तक में जोड़ा जाता है। हर साल किए जा रहे स्पेस टेस्ट या भौगोलिक जैसे अन्य तथ्यों की खोज के बाद एनसीईआरटी पुस्तक में जोड़कर नई अपडेट अथवा नया वर्जन निकाल दिया जाता है।


Upsc परीक्षा के बेसिक सिलेबस(basic syllabus) को कंप्लीट करने के लिए एनसीईआरटी पुस्तक अनिवार्य है, समस्त एनसीईआरटी पुस्तक को एक-एक करके पूरा करने की कोशिश करें जैसे कि सबसे पहले आप भूगोल या जियोग्राफी सब्जेक्ट को एनसीईआरटी के द्वारा पूरा करने के लिए कक्षा पांचवी से लेकर के कक्षा 12वीं तक की समस्त भूगोल एनसीईआरटी पुस्तक का एक साथ रीडिंग करें एक बार पढ़ लेने के बाद उसे ध्यान पूर्वक समझे और प्रत्येक एनसीईआरटी पुस्तक के खुद के अनुभव और खुद की भाषा में नोट्स बनाएं जिसे खुद का लेखन भी कहते हैं, जो आगे के समय में आपको इसी सब्जेक्ट से या इसी विषय से संबंधित ज्ञान दे सकता है और आप इसे आसानी से समझ भी सकेंगे।

 इसलिए एनसीईआरटी पुस्तक के नोट्स बनाना भी उचित माना जाता है, इसी तरह आप प्रत्येक विषय की एनसीईआरटी पुस्तक के नोट्स बना लें।

 जिसकी वजह से कम समय में ज्यादा रिवीजन भी कर सकते हैं।


ध्यान रहे कि कुछ विषय ऐसे होते हैं जिनमें प्रत्येक वर्ष या 2 से 3 वर्ष के अंतराल में बदलाव भी किए जाते हैं इसलिए आप उसमें से संबंधित पुरानी से लेकर के नई एनसीईआरटी पुस्तक को भी पढ़ें।



(5)कैसे करें ऑप्शनल/वैकल्पिक विषय का सही चयन ( how to choose optional subject)


वैकल्पिक विषय(optional subject) upsc में सिलेक्शन के लिए अहम स्थान रखता है यदि आप किसी भी सब्जेक्ट के इच्छुक हैं और आप अन्य किसी सब्जेक्ट के द्वारा स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं तो यह आपके लिए काफी मुश्किल काम होता है कि आप सही विषय का चयन चयन कर सके।

 हम आपको बता दें कि upsc के लिए आपके द्वारा चुनी गई भाषा जैसे की हिंदी या इंग्लिश माध्यम से upsc को क्वालीफाई करना चाहते हैं तो वैकल्पिक विषय पर ज्यादा जोर देना चाहिए, जैसे कि अगर आप इंग्लिश माध्यम से upsc की तैयारी कर रहे हैं तो वैकल्पिक विषय हिंदी माध्यम के तुलना में कोई खास भूमिका नहीं रखेगा। प्रारंभिक परीक्षा में आप बिना किसी परेशानी के क्वालीफाई कर सकते हैं और मुख्य परीक्षा को भी वैकल्पिक विषय द्वारा विशेष अंक प्राप्त न करने पर भी इसमें कोई ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता

 लेकिन यदि आप हिंदी माध्यम से upsc की तैयारी कर रहे हैं तो वैकल्पिक विषय आपके लिए स्टे(stay) का काम कर सकता है जैसे कि प्री या प्रारंभिक परीक्षा को आप क्वालीफाई कर जाते हैं इसके बाद ज्यादा से ज्यादा स्कोर बनाने के लिए वैकल्पिक विषय ही साथ देता है क्योंकि आप जीएस 1,2,3&4 या सामान्य अध्ययन पहला, दूसरा, तीसरा एवं चौथा को कितना भी अच्छा कर लें लेकिन बिना वैकल्पिक विषय के क्वालीफाई करना काफी मुश्किल हो जाता है।

 क्योंकि इसके बाद तीसरा चरण इंटरव्यू का होता है और इंटरव्यू में हिंदी माध्यम के छात्रों को वो अंक प्राप्त नहीं हो पाते जो हिंदी माध्यम के छात्र को चाहिए होंगे, इसीलिए हिंदी माध्यम के छात्रों को वैकल्पिक विषय पर ज्यादा जोर देना चाहिए।


 अब बात करते हैं कि किन किन बातों का ध्यान देना चाहिए-


 अगर आप स्नातक की पढ़ाई के साथ upsc की तैयारी कर रहे हैं तो हमारी राय यही होगी कि आप उसी सब्जेक्ट का चयन करके upsc को टारगेट करें अथवा upsc में वही विषय रखे हैं जो आपका स्नातक की पढ़ाई में है

 अगर आप स्नातक की पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद upsc की तैयारी कर रहे हैं तो आप किसी अन्य विषय का चयन कर सकते हैं वैकल्पिक विषय का चयन करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि आप किस फील्ड की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं अथवा किस विषय पर आप ज्यादा ध्यान दे पाएंगे और रुचि बढ़ा पाएंगे, क्योंकि प्रारंभिक परीक्षा हो जाने के बाद आप उस विकल्प का चयन नहीं कर पाते जो आप शुरुआती समय में कर सकते हैं इसलिए इस पर ज्यादा सोच विचार करना चाहिए साथ ही पहले सभी सब्जेक्ट को/सभी विषयों पर थोड़ा थोड़ा अध्ययन करें और समझें कि कौन सा विषय आपके लिए अच्छा साबित होगा और आप कुछ अनुभवी लोगों का भी सहारा ले सकते हैं जैसे कि हिंदी माध्यम के ज्यादा से ज्यादा छात्र "हिंदी साहित्य" का चयन करते हैं क्योंकि यह उनके लिए अधिक स्कोर बनाने में कामयाब होता है। इसी चयन की तुलना में मिलता-जुलता दूसरा सब्जेक्ट सोशियोलॉजी होता है सोशलॉजी को भी काफी ज्यादा हिंदी छात्रों द्वारा पसंद किया जाता है। आप जिस विषय को चुनना चाहे उस विषय के पुराने प्रश्न-पत्र को भी देखे।



(6)कैसे भरें upsc का परीक्षा फॉर्म/फॉर्म भरने का सही तरीका (how to fill upsc form step by step)


सबसे पहले बता दें कि upsc का फॉर्म तीन चरणों में भरा जाता है अर्थात upsc प्राथमिक परीक्षा, upsc मुख्य परीक्षा तथा upsc की मौखिक परीक्षा या इंटरव्यू का फॉर्म अलग-अलग स्तरों में अलग-अलग दिनांक को भरा जाता है।


Upsc प्राथमिक परीक्षा का फॉर्म भरने के लिए आपकी ग्रेजुएशन क्वालिफिकेशन की जानकारी देना आवश्यक होता है जिसमें कि आप किस वर्ष से ग्रेजुएशन कर रहे हैं एवं आपकी ग्रेजुएशन किस वर्ष को पूरी होगी।

इसके अलावा सरकार द्वारा कुछ जारी किए गए प्रमाण पत्रों को भी पेश करना अनिवार्य होता है जैसे कि प्रमाण पत्र,आय प्रमाण पत्र से संबंधित जानकारी को विद्यार्थी के माता पिता के द्वारा सत्यापन की गई आय को भरा जाता है। इसके साथ ही स्थाई निवास प्रमाण पत्र, प्रदेश का नाम भारत सरकार द्वारा जारी किया गया कोई एक प्रमाणित डॉक्यूमेंट जैसे कि आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट आदि। ध्यान रहे कि आप जो पहचान प्रमाण पत्र फॉर्म में अपलोड कर रहे हैं वही आईडी परीक्षा के समय ले जाना अनिवार्य है जैसे कि अगर आप आधार कार्ड को फॉर्म में स्कैन करते हैं तो परीक्षा हॉल में आधार कार्ड ही मान्य होगा अन्य कोई डॉक्यूमेंट मान्य नहीं होगा इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए। 

इसके साथ जाति प्रमाण पत्र की भी आवश्यकता होती है अगर आप एससी/एसटी या ओबीसी कैटेगरी से परिचय रखते हैं तो जाति प्रमाण पत्र होना आवश्यक है। यदि आप जनरल कैटेगरी या जनरल वर्ग की जाति से संबंधित है तो जाति प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता  साथ ही आपकी पासपोर्ट साइज फोटो भी साफ एवं उचित क्वालिटी की होना आवश्यक है।

 कोई डिजाइनिंग अन्य प्रोफेशनल फोटो को एप्लीकेशन फॉर्म में लगाना मना है। आपके द्वारा किए गए सिग्नेचर या हस्ताक्षर को अपलोड किया जाता है हस्ताक्षर आप किसी एक पेपर कर दें तत्पश्चात इसे फॉर्म में अपलोड कर दें ध्यान रहे कि आप हस्ताक्षर भी वही करें जो आप करते हैं और आगे करेंगे क्योंकि यह प्री परीक्षा के बाद आने वाली प्रत्येक कदम में उपयोगी होता है।

इसके साथ आपका वैकल्पिक विषय की जानकारी और प्रारंभिक परीक्षा के लिए सेंटर का चयन करना होता है।


Upsc मुख्य परीक्षा के लिए(upsc prelims form filling) फॉर्म भरने की प्रतिक्रिया Upsc की प्रारंभिक परीक्षा (prelims results announcement)का रिजल्ट घोषित हो जाने के बाद होती है।

 अगर आप Upsc की प्रारंभिक परीक्षा को उत्तीर्ण कर जाते हैं तभी आप upsc का दूसरा फॉर्म अथवा यूपीएससी के लिए मुख्य परीक्षा का फॉर्म भरने के काबिल हैं इस फॉर्म को डीएएफ डेटेंट एप्लीकेशन फॉर्म के नाम से जाना जाता है।

 यह upsc का दूसरा चरण होता है इसमें आपको आपके द्वारा भरे गए प्रारंभिक परीक्षा फॉर्म की जानकारी को भी दोहराया जाता है जैसे कि गवर्नमेंट सर्टिफिकेट, जन्मतिथि को सत्यापित करने वाला कोई एक सर्टिफिकेट, आपके विषय का नाम, आप का निवास संबंधित जानकारी आदि

साथी ग्रेजुएशन अथवा स्नातक की डिग्री को भी फॉर्म में जमा करना अनिवार्य होता है यह डिग्री भारत सरकार द्वारा किसी भी सत्यापित कॉलेज की होना अनिवार्य है।

अगर आपके पास किसी अन्य चीज का कौशल या एक्सपीरियंस है तो उसका विवरण के लिए प्रमाण भी दे सकते हैं।



मौखिक परीक्षा,upsc का आखिरी पड़ाव अथवा upsc का तीसरा फॉर्म जो upsc के मुख्य परीक्षा के रिजल्ट घोषित हो जाने के बाद भरा जाता है जिसे डीएएफ या डिटेंट एप्लीकेशन फॉर्म- दूसरा के नाम से जाना जाता है।

 इसमें upsc द्वारा तय किए गए डॉक्यूमेंट को जमा किया जाता है तथा उसी के आधार पर मौखिक परीक्षा शुरू होती है मौखिक परीक्षा में अन्य किसी प्रकार का upsc से संबंधित विवरण की जानकारी नहीं दी जाती ।



(7)upsc में उत्तर लेखन का महत्व, अच्छा उत्तर लेखन कैसे करें (importance of writing skills for UPSC)



यह upsc परीक्षा का सबसे महत्वपूर्ण भाग है तथा upsc में चयन होना या ना होना उत्तर लेखन पर ही निर्भर करता है। हम आपको उत्तर लेखन की कुछ विशेष प्रतिक्रियाओं और अच्छा उत्तर लेखन करने के लिए क्रम से जानकारी देने का प्रयास करेंगे।


अच्छा उत्तर लेखन का पहला कदम होता है प्रस्तुतीकरण- अगर आप प्रस्तुतीकरण ही सही नहीं करते तो आपकी सारी मेहनत बेकार होती है क्योंकि ज्यादातर केस में यह पाया गया है कि यूपीएससी की उत्तर पुस्तिका जांच करने वाले के मन में मनोवैज्ञानिक तत्व होते हैं, वह यह है कि अगर किसी भी उत्तर पुस्तिका या उत्तर का प्रस्तुतीकरण ठीक ही नहीं है तो आगे का उत्तर भी ठीक नहीं होगा और वह उस हिसाब से अंक दे देते हैं तथा आगे का आपके द्वारा लिखा गया समस्त लेखन को कोई मुख्य महत्व नहीं दिया जाता इसलिए उत्तर का प्रस्तुतीकरण अच्छा होना चाहिए।

 अच्छा प्रस्तुतीकरण करने के लिए-

सुंदर उत्तर लिखना चाहिए, उत्तर की सजावट उतनी ही करनी चाहिए जितनी अच्छी लगे अथवा अगर आप किसी भी उत्तर में ग्राफ या नक्शा में अधिक सजावट करते हैं तो आपका उत्तर बेकार हो सकता है, अच्छे स्पष्ट सुंदर और शुद्ध पैराग्राफ बनाने चाहिए, जिस उत्तर में ग्राफ नक्शा की जरूरत हो उसे नक्शे द्वारा समझाया जाना चाहिए और उसका विवरण करना चाहिए, जिस पेन या पेंसिल का आप चयन करते हैं उसका कलर भी यह निर्भर करता है कि आपका उत्तर कितना अच्छा होगा इसलिए पेन कलर का विशेष ध्यान देना चाहिए।


दूसरा होता है विस्तार या परिधि- उत्तर को विस्तार में लिखना चाहिए जो प्रश्न पूछा गया हो उसी से संबंधित जवाब देना चाहिए उसके अलावा कुछ भी अनावश्यक नहीं लिखना चाहिए और उस प्रश्न के माध्यम से परीक्षा जो पूछना चाह रहा है ध्यान रखें कि वह कुछ भी छूटना नहीं चाहिए।

 इसमें मुख्य कार्य होता है कि आप परीक्षक के मनोविज्ञान को समझने की कोशिश करें कि आखिर वह आपसे किस प्रकार का उत्तर चाहता है या क्या जानना चाहता है, उस हिसाब से आप उत्तर लेखन करें।


अनुपात या संतुलन का विशेष ध्यान रखना- कई बार ऐसा होता हो जाता है कि किसी प्रश्न के माध्यम से दो पक्षों का विवरण करना हो लेकिन उस विवरण में आपके द्वारा अनुपात या उन दोनों का संतुलन बिगड़ जाए तो यह अच्छा उत्तर नहीं माना जाता।

 इसलिए ध्यान रहे कि बहुपक्षीय प्रश्नों में जैसे कि किसी दो पक्षों की बात हो तो उसमें अनुपात का विशेष ध्यान रखें और दोनों का अनुपात तथा दोनों का संतुलन समान बना रहे। कोई भी पक्ष अधिक ना हो, कोई भी पक्ष आपके द्वारा एक तरफा विवरण नहीं किया होना चाहिए।


प्रमाणिकता के साथ उत्तर लेखन- प्रमाण के लिए आप आर्टिकल या सेक्शन को लिख सकते हैं, पूरा का पूरा लेखन सॉलिड होना चाहिए अथवा कच्चा नहीं होना चाहिए वजनदार शब्दों में और कम शब्दों में अधिक से अधिक बात कही जानी चाहिए, अच्छे  नक्शे बनाकर/ग्राफ खीचकर या बनाकर उसका विवरण करना चाहिए तथा उत्तर को अच्छे से समझाना चाहिए, अगर किसी उत्तर में आपके द्वारा किसी पुस्तक या किसी कविता की चर्चा की जाए तो उस पुस्तक का नाम उस लेखक का नाम और हो सके तो दिनांक भी लिखना चाहिए, इसके अलावा जिस उत्तर में कविता की जरूरत हो उसे कविता के साथ प्रस्तुत करना चाहिए।


उत्तर लेखन में भाषा- यदि आप अंग्रेजी माध्यम से तैयारी कर रहे हैं तो भाषा जैसे टॉपिक में आपको कोई विशेष परेशानी नहीं आती लेकिन अगर आप हिंदी माध्यम से तैयारी कर रहे हैं तो भाषा का भी विशेष ध्यान देना चाहिए तथा उत्तर लेखन में इसका बहुत महत्व होता है।

 अच्छी भाषा और वजनदार शब्दों के साथ उत्तर को लिखना चाहिए जैसे कि- आपके उत्तर में प्रवाह हो, शुद्धता हो, वर्तनी हो आपके द्वारा लिखे गए अक्षर शुद्ध होने चाहिए, उत्तर लेखन में व्याकरण और वाक्य की रचना का विशेष ध्यान देना चाहिए, शब्दावली पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए जैसे कि साफ सुथरा और स्वच्छ अक्षर में लिखना चाहिए,

 तस्मई भाषा का भी प्रयोग करना चाहिए, हिंदी के साथ कुछ अन्य भाषा के शब्दों को भी लिखना चाहिए।

 यह आपके उत्तर को और भी अच्छा बनाने में मदद करते हैं।



(8)upsc परीक्षा पैटर्न, (upsc exam pattern):-



UPSC एक त्रिस्तरीय परीक्षा( three layer system exam) है जो तीन विशेष चरणों से होकर गुजरती है जैसे कि हमारे द्वारा ऊपरी पृष्ठ में बताए गए यूपीएससी परीक्षा के संबंधित विचारों से आप यह पता लगा चुके होंगे कि यूपीएससी का पैटर्न सामान्यता किस प्रकार का होता है।


UPSC के सभी पड़ाव को मिलाकर लगभग 9 परीक्षा प्रश्न पत्र होते हैं जिसमें कुल 7 परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों के अंक जोड़े जाते हैं अर्थात दो परीक्षाओं के प्रश्नपत्र ऐसे होते हैं जिनकी अंक परिणाम में नहीं जोड़े जाते अतः इन 7 परीक्षाओं को मिलाकर ही रैंक सूची तय होती है और उसी के आधार पर सिविल सेवा में पोस्टों को रैंक के आधार पर ही प्रदान कराया जाता है।



UPSC प्राथमिक परीक्षा-इस परीक्षा का सिलेबस निश्चित होता है अतः यूपीएससी द्वारा प्री परीक्षा के लिए सिलेबस को निश्चित किया है जो आपको ऊपर बताया गया है उस सिलेबस को ध्यान में रखते हुए आप upsc की प्रारंभिक परीक्षा से आगे बढ़ सकते हैं, चंद प्रश्न ऐसे होते हैं जो किसी बाहरी फील्ड से पूछे जाते हैं लेकिन ज्यादातर प्रश्न चुने गए सिलेबस के ही होते हैं।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा में सभी प्रश्न विकल्प रूप में पूछे जाते हैं।

UPSC की प्राथमिक परीक्षा दो खण्ड में होती है जिसमें प्रत्येक खंड अथवा प्रत्येक पेपर कुल 200 अंक का होता है तथा इन दोनों को मिलाकर कुल 400 योग होता है।

 आपको बता दें कि upsc की प्राथमिक परीक्षा वैकल्पिक प्रश्नों के साथ कराई जाती है जिसमें 0.63 की माइनस मार्किंग या नेगेटिव मार्किंग भी होती है।


UPSC मैंस (upsc Mains exam paper) परीक्षा या upsc मुख्य परीक्षा- इस परीक्षा के लिए भी upsc द्वारा निश्चित सिलेबस चुना गया है और यह बताया गया है कि किन किन विषयों से मिलकर मुख्य परीक्षा में प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

 लेकिन इस परीक्षा में प्रारंभ परीक्षा की अपेक्षा कुछ प्रश्न होते हैं जिनकी संभावना यह होती है कि वह किसी अन्य टॉपिक या किसी एक अन्य विषय से पूछे जा सकते हैं यह प्रश्न बहुत ही कम होते हैं अतः इन प्रश्नों की संख्या बहुत कम होती है। इस परीक्षा के लिए भी अधिकतम प्रश्न मुख्य सिलेबस से ही आते हैं।

 लेकिन कुछ प्रश्न ऐसे होते है कि जो उससे संबंध नहीं रखते।

UPSC की मुख्य परीक्षा(upsc mains exam) के कुल अंकों का योग  1750 होता है। जिसमें पिछले वर्ष तथा अन्य वर्षो की तुलना करके एवरेज अंक निकाले जाएं तो 1200 अंक के लगभग में उचित रैंक प्राप्त हो जाती है।



कुछ छात्रों के दिमाग में एक अलग बात रहती है कि ज्यादातर प्रश्न बाहरी सिलेबस से पूछे जा सकते हैं लेकिन ऐसा होता नहीं है क्योंकि उसी सिलेबस से पूछा गया प्रश्न को अनेक प्रकार से तोड़ और घुमा के पेश किया जाता है कि छात्र को लगता है यह किसी अन्य या बाहरी सिलेबस से पूछा गया प्रश्न है

 इसलिए ध्यान रखें कि समस्त सिलेबस को ध्यान पूर्वक समझना चाहिए और उस पर खुद के विचार को भी व्यक्त करना चाहिए।

 आप आसानी से खुद कर सकते हैं कि किसी विशेष टॉपिक पर कितने तरीकों से प्रश्न पूछा जा सकता है आप उसको हर तरीके से करें जिससे संबंध रखने वाला कोई भी प्रश्न आपके सामने आए तो आप उसका जवाब आसानी से दे पाए।


UPSC मौखिक परीक्षा/ या upsc इंटरव्यू upsc interview- यूपीएससी मौखिक परीक्षा का सिलेबस निश्चित नहीं होता अतः यह सिर्फ किताबी ज्ञान से नहीं जुड़ा होता upsc मौखिक परीक्षा के लिए छात्र की पर्सनालिटी और मनोविज्ञान के आधार पर आगे बढ़ाया जाता है।

कुछ सामान्य बातों को भी देखा जाता है कि छात्र किस तरीके से सिविल सेवा के लिए उचित है।  या उचित है भी या नहीं, जैसे आपके अंदर कितनी दृढ़ सक्ती है आदि विशेषताओं को परखा जाता है।

 UPSC की मौखिक परीक्षा(upsc interview) का योग 275 अंक का होता है तथा इन अंकों को मिलाकर आखिरी परिणाम घोषित किए जाते हैं और उसी के आधार पर रैंक(rank) सूची को निकाला जाता है।



(9) UPSC का रिजल्ट और चयन discussion:about upsc results and passing rank:- 


का 


आईएएस के लिए निम्नतम रैंक या नंबर (कटऑफ/cutoff)

वर्ग के आधार पर वर्गीकरण- 



आईएएस/IAS की पोस्ट के लिए रैंक-


For general candidates/जनरल वर्ग से परिचय रखने वालों के लिए कम से कम 92 रैंक लाना आवश्यक है 

ओबीसी (obc)अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग जातियों के लिए कम से कम 457 वी रैंक लाना आवश्यक है 

Sc/एससी वर्ग के लिए 452 

St/एसटी वर्ग के लिए 528 वीं रैंक


आईएफएस की पोस्ट पाने के लिए रैंक/IFS rank-


General candidates/जनरल वर्ग के लिए 134 वीं

OBC ओबीसी अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 450 वीं

Sc एससी के लिए 468 वीं

St एसटी वर्ग के लिए 603 वी रैंक


आईपीएस(IPS post rank) पोस्ट के लिए रैंक-


For General Catogry जनरल के लिए 236 

Obc Catogry ओबीसी के लिए 480

Sc Catogry एससी के लिए 638 

St Catogry एसटी के लिए 645


आईआरएस आईटी (IRS IT rank)के लिए रैंक


General Catogry/जनरल के लिए 239

 Obc Catogry/ओबीसी के लिए 485

Sc Catogry/ एससी के लिए 602 

St Catogry/एससी के लिए 474           

         

आईआरएस IRS c&ce के लिए रैंक


General Catogry/जनरल के लिए 265

Obc Catogry/ ओबीसी के लिए 515

 Sc Catogry/एससी के लिए 649

St Catogry/ एसटी के लिए 680 


आईएएएस (IAAS) के लिए रैंक-


जनरल के लिए 263

 ओबीसी के लिए 521

 एससी के लिए 657 

एसटी के लिए 683 वीं रैंक


UPSC परीक्षा का प्रारंभिक पेपर और मुख्य परीक्षा के बाद भी यह तय नहीं होता कि आप upsc की किस ब्रांच के लिए चयनित हुए हैं अतः इसका सीधा सा मतलब है कि upsc की मौखिक परीक्षा के बाद ही यह तय किया जाता है कि आप किस सिविल सेवा में कार्यरत होंगे तथा upsc की मौखिक परीक्षा के बाद फाइनल परिणाम घोषित किए जाते हैं और रैंक के आधार पर उन्हें सिविल सेवाएं प्राप्त कराई जाती हैं।


(10) UPSC की ब्रांचें (upsc branches/services):- 


यूपीएससी के पोस्टों को लगभग सभी फील्ड में स्थिर किया गया है लेकिन यूपीएससी मुख्य ब्रांचे आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, आईएफओएस, आईआरएस आदि इसकी मुख्य ब्रांच हैं।


  1. आईएएस(IAS) इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस
  2. आईपीएस(IPS) इंडियन पुलिस सर्विस
  3.  आईएफएस(IFS) इंडियन फॉरेन सर्विस 
  4. आईएफओएस(IFoS) इंडियन फॉरेस्ट सर्विस
  5. आईआरएस(IRS) इंडियन रेवेन्यू सर्विस


इसके अलावा रेलवे, गृह मंत्रालय, राष्ट्रपति भवन और अन्य राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक इसकी अनेक पोस्ट होती हैं जिनको प्रमोशन के जरिए upsc द्वारा चयनित छात्रों को दिया जाता है।

 आपको जानकारी के लिए बता दें कि आईएएस सिविल सेवा की एक ऐसी पोस्ट है जो सबसे ज्यादा प्रमोशन के साथ उच्च स्तर तक पहुंचती है।

 

(11)चयनित अभ्यर्थियों के अनुभव और विचार ( experience and tips):- 


UPSC की पढ़ाई शुरू करने से पहले पूरे सिलेबस को ठीक ढंग से समझने के बाद टाइम टेबल बनाना अथवा प्लानिंग करना जरूरी होता है।

 Upsc के लिए अगर आप 1- 2 साल के बीच क्वालीफाई करना चाहते हैं तो आपको यह शुरुआत समय में ही निश्चित करना होगा कि आपको पढ़ाई किस दिशा में व किस प्रकार करनी है।


 चयनित अभ्यर्थियों द्वारा यह बताया गया है कि ज्यादातर अभ्यर्थी गलती करते हैं कि प्राथमिक upsc परीक्षा क्वालीफाई हो जाने के बाद मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू परीक्षा की तैयारी करते हैं जोकि यह उत्तम नहीं है, मुख्य परीक्षा में अगर पास भी हो जाए तो इंटरव्यू के बाद डिसक्वालीफाई हो जाते हैं फिर इसी क्रम से अगले साल यही प्रतिक्रिया दुहराती है अथवा upsc का सिलेबस नहीं हो पाता और वह अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा के लिए भी  चयनित नहीं होता।

UPSC का जितना भी सिलेबस है उसको सभी एनसीईआरटी पुस्तकों को पढ़ने के बाद ही देखा जाए सीधा सा मतलब यह है कि upsc की अन्य किताबें या अन्य पुस्तकों को पहले नहीं पढ़ना चाहिए, पहले सामान्य ज्ञान अथवा बेसिक ज्ञान को एनसीईआरटी किताब के जरिए पूरा होना चाहिए।


आप कोशिश करें कि नोट्स भी उसी तरह से बनाएं जिस तरह से आप upsc में उत्तर लेखन करना चाहते हैं अथवा उत्तर लेखन की प्रैक्टिस नोट्स मेकिंग के समय करनी चाहिए और लगातार करते रहनी चाहिए।

 प्रत्येक वर्ष की मैगजीन और अपडेट को खुद के हैंड नोट्स द्वारा बनाना चाहिए और करंट अफेयर्स को भी किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या अखबारों के जरिए कलेक्ट करना चाहिए।

कोई भी विशेष अखबार ऐसा नहीं है जिस जो आप upsc के लिए उसे ही चुने, आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी अखबार का चयन कर सकते हैं और सामाजिक जानकारी से राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय जानकारी से अपडेट रह सकते हैं।

शुरुआती समय से ही पत्र लेखन प्रारंभ करें और या कोशिश करें कि कम समय में ज्यादा लिख सकें और अच्छा लिख सकें, उत्तर लेखन में किसी भी प्रकार की काट पीट नहीं होनी चाहिए स्वच्छ एवं सुंदर अक्षर लिखना चाहिए।


 ध्यान रखें कि  upsc के लिए पासिंग अंक के स्थान पर नहीं रहना चाहिए, उससे अधिक अंक लाना अनिवार्य है अतः अगर आप upsc पासिंग अंक ही पा सके हैं तो आपके लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए भाषा विषय पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए हिंदी भाषा व्याकरण, वर्तनी और शब्दकोश को अच्छा बनाना चाहिए।


सिर्फ एक भाषा पर आश्रित नहीं होना चाहिए कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनका प्रयोग हिंदी के अलावा किसी अन्य भाषा में करना ज्यादा उचित होता है। इसलिए हिंदी के साथ-साथ इंग्लिश के कुछ शब्दों का उपयोग कर सकते हैं।

क्योंकि कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनका हिंदी अर्थ सटीक ढंग से निकाल पाना असंभव होता है इसलिए ध्यान रखें कि उस शब्द से संबंधित अर्थ इंग्लिश में लिखना जरूरी है अगर आप ऐसे शब्द को सिर्फ हिंदी में लिखेंगे तो संभावना रहेगी कि आप उस उत्तर से ज्यादा स्कोर नहीं कर सकेंगे।


आपके द्वारा लिखे गए उत्तर में अगर आप किसी ऐसे टॉपिक पर बात करना चाहते हैं जिसकी वजह से परीक्षक को आसानी से समझा सकें और अगर आप कुछ ऐसे शब्दों का उपयोग कर रहे हैं जो परीक्षा के लिए जानना जरूरी है तो हमेशा उन शब्दों को अंडरलाइन अथवा हाईलाइट करना जरूरी है, जिसकी वजह से परीक्षक आप की उत्तर पुस्तिका को ठीक ढंग से निरीक्षण कर पाएगा और उत्तर को समझने में काफी आसानी होगी।



(12)मौखिक परीक्षा की तैयारी और मौखिक परीक्षा में ध्यान रखने योग्य बातें (upsc interview)


मौखिक परीक्षा(Upsc interview)का कुल योग 270 अंक का होता है।


मौखिक परीक्षा में मूल रूप से विद्यार्थी के आचरण स्वभाव और मनोविज्ञान( psychology) को परखा जाता है इसमें ज्यादातर विद्यार्थी के जीवन और उसके परिचय से वार्तालाप की जाती है मौखिक परीक्षा में किताबी ज्ञान से ज्यादा पर्सनालिटी और कुछ सामाजिक तथ्यों के आधार पर प्रश्न पूछे जाते हैं जिसकी वजह से परीक्षक इस बात का निर्णय करते हैं कि आप सिविल सेवा के लिए उचित है या नहीं। 


ज्यादातर छात्रों के मन में यह बात रहती है कि मौखिक परीक्षा की तैयारी प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा के बाद की जाती है अगर आप ऐसा करते हैं तो आपके सफल होने की संभावना कम हो जाती हैं।

मौखिक परीक्षा की तैयारी शुरुआती समय से ही की जाती है अगर आप किसी कॉलेज अथवा विश्वविद्यालय में स्नातक कर रहे हैं तो आपके पास ज्यादातर समय है कि तैयारी के साथ परीक्षा से जुड़े कुछ विशेष किस्म के प्रश्न को समझने की कोशिश करें तथा अच्छे और वजनदार शब्दों का प्रयोग करें। 

मौखिक परीक्षा में यह देखा जाता है कि छात्र कितनी दृढ़ता से जवाब देता है इसलिए आप जो भी जवाब दें उसका हल पहले से सोचा समझा होना चाहिए, इसलिए चयनित अभ्यर्थी तथा अनुभव लोगों के द्वारा सुझाव दिया जाता है की इस परीक्षा की तैयारी शुरुआती दौर से करनी चाहिए।

 जब आप मुख्य परीक्षा में चयनित हो जाते हैं उसके बाद मौखिक परीक्षा की तैयारी के लिए संस्थानों का सहारा भी ले सकते हैं।


 अगर आपके आसपास upsc सिविल सर्विस से संबंधित कोई संस्थान है तो वहां जाकर बतौर प्रैक्टिस के रूप में यह परीक्षा दे सकते हैं जिससे आपके द्वारा होने वाली गलतियों को परखा जाए और आप उसका सुधार कर सकें।


मौखिक परीक्षा में कुछ प्रश्न ऐसे होते हैं जिसका जवाब पहले से दिमाग में होना आवश्यक है आप उन प्रश्नों का जवाब तुरंत नहीं सोच सकते इसलिए किसी भी संस्थान में मौखिक परीक्षा देने की प्रैक्टिस अवश्य करें।


 - परीक्षा के समय किस प्रकार से उत्तर का जवाब देना चाहिए-


  खुद के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी देनी चाहिए इंट्रोडक्शन देते समय खुद की चर्चा होनी चाहिए अन्य के बारे में फालतू  बातों को छोड़ना चाहिए। खुद की शिक्षा स्तर को बताना चाहिए/ क्वालिफिकेशन की जानकारी देनी चाहिए, अगर आपने अपने जीवन में कोई विशेष कार्य किया हो तो उसकी जानकारी देनी चाहिए। कॉन्फिडेंस से उत्तर को पेश करना चाहिए, तनाव में नहीं रहना चाहिए, कच्ची बात करने से बचें,ठोस शब्दों में तथा उदाहरण सहित समझाना चाहिए।


(13)आपके योग्य upsc ब्रांच/सर्विस का चयन (selection of IAS/IPS/IFS/IFoS/IRS):- 


आप किस सिविल सेवा के लिए उपयुक्त है यह आप और आपके साथ परीक्षक भी जानता है लेकिन कुछ बातें ऐसी है जो सिर्फ आप जानते हैं आप अपने स्वभाव, कार्य करने की शक्ति, कार्य का प्रकार, रहन-सहन तथा भाषा के अनुसार सिविल सेवा  ब्रांच की कोई एक विशेष ब्रांच को चुन सकते हैं अगर आप upsc संपूर्ण रिजल्ट की अच्छी रैंक हासिल करते हैं तो आपके पास बहुत सारे विकल्प होते हैं आप जिस ब्रांच को चुना चाहे वह आपको आसानी से मिल जाती है।

 लेकिन यदि आप किसी एक निश्चित रैंक तक अंक ला पाते हैं तो यह आपकी रैंक पर निर्भर करता है। आईएएस, आईपीएस आईएफएस, आईआरएस आदि अलग अलग कैडर विशेषताओं और कार्य के आधार पर वर्गीकृत है यदि आप समाज में दिए जाने वाले सम्मान की तुलना की करें तो आईएएस पोस्ट सबसे आगे हैं। आईएएस को बहुत सारी सुविधाएं दी जाती है लेकिन या सुविधाएं राज्य अथवा केंद्र सरकार तक ही सीमित रहती हैं।

 अगर आप अधिक सुविधाओं सम्मान के साथ निवास स्थान के आसपास रहना पसंद करते हैं तो आईएएस आपके लिए एक अच्छी पोस्ट होगी, आईएएस में अन्य सिविल सेवा वर्गों की अपेक्षा अधिक स्कोप है अगर आप कम उम्र में आईएएस बन जाते हैं तब ज्यादातर संभावना रहती है कि आप भारत सरकार के सबसे बड़े पद तक पहुंच सकते हैं राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच में जो मुख्य सबसे बड़ा पद होता है उसे कैबिनेट सेक्रेटरी(cabinet secretary) कहते हैं।


 आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जितने भी कैबिनेट सेक्रेटरी(cabinet secretary) है वह सभी आईएएस चयनित अभ्यर्थी हैं जो प्रमोशन के बाद उस पोस्ट तक पहुंचते हैं। आईएस सिविल ड्रेस में कार्यरत होते हैं तथा यह मुख्यता समाज के साथ जिले को संभालना होता है यह भारत सरकार की एकमात्र सबसे ज्यादा शक्तिशाली नौकरी है।


UPSC परीक्षा की दूसरी सबसे लोकप्रिय पोस्ट आईपीएस मानी जाती है, आईपीएस आईएस के बाद सबसे ज्यादा कार्यरत नौकरी है। IPS वह वर्ग पोस्ट है भारत सरकार तथा गृह मंत्रालय के कानून व्यवस्था और इंडियन कांस्टीट्यूट पर कार्य करती है आईपीएस की लोअर पोस्ट से उच्च पोस्ट तक का सफर निश्चित होता है अतः आईपीएस आईएएस जैसा बहुविकल्पीय पोस्ट नहीं है।


 आईपीएस ips में प्रोग्रेस के नाम पर पोस्टों को निश्चित किया गया है उसके अलावा आपकी इच्छा के अनुसार कोई अन्य वर्ग में शामिल नहीं हो सकते जबकि आईएएस में ऐसा नहीं होता है।

 आईएएस में ऐसी अनेकों अनेकों पोस्ट होती हैं जहां पर बिना किसी कानूनी प्रोग्रेशन और प्रमोशन promotion से वहां तक पहुंचा जा सकता है।

 अगर आपका सपना वर्दी पहन कर कार्य करना है तो आईपीएस से बड़ी कानूनी पोस्ट कोई नहीं है इसलिए अगर आप इस तरीके की सोच रखते हैं तो आईपीएस ज्वाइन करना चाहिए।


IFS इंडियन फॉरेन सर्विस यूपीएससी की आईएएस तथा आईपीएस से बिल्कुल भिन्न पोस्ट होती है।


 अगर आप शांति वाला कार्य पसंद करते हैं तो आपको आईएफएस(ifs) चुनना चाहिए आई एफ एस के लिए भी भारत सरकार द्वारा काफी ज्यादा सुविधाएं और पावर दी जाती है इसकी सैलरी भी प्रत्येक जोड़ के अनुसार अन्य नौकरियों से ज्यादा मानी जाती है आईएफएस ऑफिसर(ifs officer) का निवास निश्चित नहीं होता अतः वह किसी भी क्षेत्र में कार्य कर सकते हैं आईएफए ऑफिसर एक विशेष नियम पर कार्यरत होता है।


आईआरएस(irs) यानी इंडियन रिवेन्यू सर्विस, यूपीएससी की निम्न ब्रांचों में से यह भी बड़ी ब्रांच है।

 यह छात्रों को upsc द्वारा प्राप्त की गई रैंक के अनुसार सौंपी  जाती है लेकिन ज्यादातर छात्र वही होते हैं जो एक से अधिक भाषा जैसे इंग्लिश जैसी भाषा को क्रिमिनली समझते हैं तथा बोलते हैं वह IRS के लिए मान्य हैं।

 अगर आप सिंगल या एक मातृभाषा को ही समझते हैं तो IFS अथवा IRS जैसी सर्विस आपके लिए नहीं है।


(14)सिविल सेवा के पदों का कार्य के आधार पर वर्गीकरण(upsc post division):-


एक IAS ऑफिसर का चयन होने के बाद आईएएस का कार्य नहीं सौंपा जाता क्योंकि जिला कलेक्टर के कार्य को संभालने से पहले जिला कलेक्टर के साथ असिस्टेंट के रूप में कार्य किया जाता है।

 UPSC द्वारा चयनित आईएस पद के लिए छात्र जिले के डिप्टी कलेक्टर के रूप में कार्यरत होते हैं जिसे सब डिविजनल मजिस्ट्रेट sub divisional magistrate यानी एसडीएम (SDM)कहा जाता है।

 एसडीएम(sdm) पोस्ट कलेक्टर के नीचे कार्यरत होती है तथा इसके बाद अनुभव और कार्य के आधार पर जिले का कलेक्टर का कार्य सौंपा जाता है। एक आईएएस ऑफिसर का कार्य या उसके दिनचर्या के घंटे कार्य के अनुसार निश्चित नहीं होते। आईएएस ऑफिसर किसी प्रकार का ऑपरेशन या प्लानिंग करने के लिए अपने किन्ही भी समय में कार्य कर सकता है।

 आईएएस ऑफिसर को जिले के साथ-साथ भारत सरकार और देश से संबंधित बड़े-बड़े उन्नति कराने और देश को सही दिशा बताने में सहयोगी होते हैं। भारत सरकार द्वारा कई बार सर्वेक्षण किए जाते हैं जोकि आईएएस ऑफिसर प्रत्येक जिले के सर्वेक्षण के द्वारा पूरे भारत का सर्वेक्षण किया जाता है।

 आईएएस ऑफिसर जिले के समस्त विभागीय अधिकारियों का भी निरीक्षण करते हैं तथा उन सभी की कार्यप्रणाली को एक समानता रूप से बनाए रखने नियमों का पालन कराया जाता है जिसके लिए आईएएस ऑफिसर द्वारा मीटिंग की जाती हैं तथा कार्य को आगे बढ़ाया जाता है।

 किसी कार्य में बदलाव या जिले में किसी विशेष नियम का बनना आईएएस ऑफिसर/ias officer का सुझाव या आदेश होता है।


आईएफएस ऑफिसर/ifs officer का कार्य भारत के किसी निश्चित क्षेत्र से जुड़ा हुआ नहीं होता है यह भारत के बाहर अनेक देशों के आधार पर कार्य संभालता है।

आईएफएस ऑफीसर को अन्य किसी ऑफिसर के मुकाबले अधिक यात्रा करनी होती है तथा पूरी दुनिया के कार्य को देखते हुए देश के कारक और देश को संभालने में उन्नति करता है।

 आईएएस ऑफिसर देश का तीसरा सेक्रेटरी तथा सेकेंडरी सेक्रेटरी हाई कमिश्नर आदि के साथ जुड़ा हुआ होता है एक आईएफएस ऑफिसर को आईएस जैसी सारी सुविधाएं दी जाती हैं।

आईएफएस ऑफीसर खुद की शिक्षा को किसी अन्य देश में जाकर भी कर सकता है आईएएस ऑफिसर के पास कुछ ऐसी सुविधाएं होती हैं जो ना तो आईएएस के पास होती हैं और ना ही आईपीएस ऑफिसर के पास होती हैं।


आईपीएस की ट्रेनिंग(ips officer training) सिविल सेवा की अन्य ब्रांच की अपेक्षा काफी कठिन और ज्यादा होती है।

 यह कानूनी पावर का सबसे बड़ा रूप होता है। एक आईपीएस ऑफिसर को भी काफी ज्यादा छूट प्रदान होती है और वह भी विदेश यात्रा के लिए कार्य को सौंपा जाता है तथा अनेक प्रशिक्षण किए जाते हैं आईपीएस ऑफिसर सबसे पहले असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ़ पुलिस यानी कि एएसपी(ASP) के तौर पर तैनात होता है तथा इसके बाद असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस तक जाता है।


 इसकी सबसे बड़ी पोस्ट इंटेलिजेंट ब्यूरो(intelligence Bureau) होती है जो कि एक अनुभवी आईपीएस की उच्चतम पोस्ट मानी जाती है। आईपीएस ऑफिसर के कार्य की शुरुआत सामान्य कानूनी कार्य से होती है आईपीएस ऑफिसर को किसी विशेष ऑफिसर के साथ रखा जाता है तथा यह ट्रेनिंग बाद उसके कार्य को संभालता है।


आईआरएस इंडियन रिवेन्यू सर्विस भारत सरकार की बहुत बड़ी पोस्ट होती है जो टैक्स से संबंधित कार्य को संभालती है।

 इसके अलावा अनेक रेवेन्यू को चेक करती है और भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ाने में सहयोगी पोस्ट होती है।

 आईआरएस ऑफीसर(IRS officer) सबसे पहले असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स ऑफिसर( assistant commissioner of income tax officer) के कार्य पर तैनात होता है इसके कुछ सालों बाद वह प्रमोशन के जरिए ज्वाइंट कमिश्नर या एडीशनल कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स ऑफिसर( additional commissioner of income tax officer) तक पहुंचता है। आईआरएस ऑफिसर की पोस्टिंग मुख्यतः बड़े शहरों में की जाती है तथा बड़ी इकोनामिक व्यवस्था और अन्य आर्थिक कार्य की सीमा को बढ़ाते हैं। एक आईएएस ऑफिसर के पास कार्य के घंटे निश्चित होते हैं जैसा कि अभी हमने बताया की आईएएस ऑफिसर के पास दिन  का कोई भी समय निश्चित नहीं होता लेकिन आईआरएस ऑफीसर के पास कार्य करने का निश्चित समय होता है।



 (15)आईएस/आईपीएस/आईएफएस/आईआरएस आदि सिविल सेवाओं की सैलरी और दी जाने वाली सुविधाएं(IAS,IPS,IFS,IRS etc salary and 

perks):- 


आईएएस ऑफिसर कार्य की शुरुआत सब डिविजनल मजिस्ट्रेट यानी कि एसडीएम, एसडीओ और सब कलेक्टर आदि से कराई जाती हैं। इनको सातवीं भुगतान कमिशन के अनुसार 50000 से डेढ़ लाख तक मासिक तनख्वाह होती है जो जूनियर ग्रेड स्केल के अन्तर्गत आती है।

  सीनियर टाइम स्केल के अन्तर्गत डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट कलेक्टर या सेक्रेटरी तथा गवर्नमेंट मिनिस्ट्री होता है इस इन सभी सर्विस के लिए डेढ़ लाख और अधिक रुपए प्रतिमाह वेतन के रूप में दिया जाता है।


 स्पेशल सेक्रेटरी या हेड ऑफ वेरियस गवर्नमेंट डिपार्टमेंट को १.५ लाख से दो लाख के बीच दी जाती है।

 सेक्रेटरी से मिनिस्ट्री को एक लाख से ₹2 लाख प्रति माह वेतन के तौर पर दिए जाते हैं।


 प्रिंसिपल सेक्रेटरी ऑफ इंपॉर्टेंट डिपार्टमेंट के लिए भी एक से ₹2 लाख प्रति माह दिए जाते हैं।


 आईएएस ऑफिसर की सबसे बड़ी पोस्ट कैबिनेट सेक्रेटरी होती है जिसे ढाई लाख के लगभग प्रतिमाह वेतन दी जाती है यह सिर्फ आईएएस की नहीं सभी बल्कि स्तर की सबसे बड़ी पोस्ट होती है।


कैबिनेट सेकेट्री(cabinet secretary) प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपति की बीच की कड़ी होती है।



इसके अलावा सिविल सर्विस ऑफिसर को भारत सरकार द्वारा अनेक सुविधाएं दी जाती हैं जैसे रहने के लिए बंगला,गाड़ी, बिजली बिल टेलीफोन बिल और इसके साथ कानूनी गाड़ी का उपयोग जैसे कि आईएएस एक ऐसी पोस्ट है जो सरकार द्वारा दी गई गाड़ी को खुद के कार्य में भी उपयोग कर सकते हैं अतः सरकारी व्हीकल को खुद के कार्य में उपयोग करने पर कोई भी रोक नहीं है जबकि आईपीएस आईएफएस आईआरएस जैसी अनेक पोस्टों के लिए सरकारी व्हीकल सिर्फ सरकारी कार्य से संबंधित के लिए होती है अतः आईएएस के अलावा अन्य अधिकारी किसी की पर्सनल कार्य में सरकारी व्हीकल को उपयोग में नहीं कर सकते।


 इसके साथ और भी अनेक पर्क्स और सुविधाएं प्रदान कराई जाती हैं।


आईपीएस ऑफिसर की(ips officer's salary) वेतन ₹56000 से शुरू होकर ढाई लाख रुपए तक होती है जिस प्रकार आईएएस ऑफीसर सबडिविजनल कलेक्टर के रूप में कार्य करता है उसी प्रकार एक आईपीएस ऑफिसर भी सबसे पहले असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के पर पोस्ट पर कार्य करता है तथा इसे सबसे पहली पोस्ट के लिए ₹56000 मासिक तनख्वाह होती है जो उच्चतम पोस्ट में बढ़कर ₹300000 प्रति माह तक हो जाती है।


आईआरएस ऑफीसर(IRS officer) को आईपीएस तथा आईएएस जैसी पोस्ट से अधिकतम तनख्वाह मिलती है आईआरएस ऑफीसर की लोअर पोस्ट जिसे ज्वाइंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स कहते हैं, को लगभग ₹50000 से शुरुआती की तनख्वाह दी जाती है तथा इसकी उच्चतम रैंक अथवा उच्चतम पोस्ट पर 3 से ₹5 लाख प्रति माह तक दी जाती है।


आईएफएस ऑफिसर(ifs officer) यानी इंडियन फॉरेन ऑफिसर को सभी सुविधाओं के अलावा शुरुआती तनख्वाह ₹60000 प्रति मासिक दी जाती है तथा यह बढ़कर लगभग ₹300000 प्रति माह तक पहुंच जाती है आईएफएस अधिकारी विदेशी देशों से जुड़े हुए होते हैं  जिसकी वजह से इन्हें और भी अधिक तनख्वाह मिलने की संभावना होती है।

 आईएफएस(ifs) एक अलग किस्म की नौकरी है जो सिविल सेवाओं की सभी नौकरियों से भिन्न होती है इसमें तनख्वाह के साथ-साथ कुछ ऐसी सुविधाएं भी दी जाती हैं जो अन्य किसी नौकरी में नहीं मिलती।



(16) UPSC से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी(Other information about upsc,civil service examination(cse):- 


UPSC परीक्षा में हर साल कुछ न कुछ समस्याओं का सामना करते हुए भारत सरकार  इसके बदलाव के बारे में सोचती है तथा कुछ हद तक बदलाव भी किए जा रहे हैं।


 UPSC परीक्षा को देने से पहले आप यह तय करें कि इसे क्वालीफाई करने का आपके अध्ययन के अनुसार चयनित वर्ष कौन सा है अतः आप किस वर्ष इसे क्वालीफाई करना चाहते हैं, क्योंकि upsc में निश्चित अटेम्त/प्रयास होते हैं अगर उनके बाद आप इसको  उत्तीर्ण नहीं कर पाते तो आप यूपीएससी को दोबारा नहीं दे पाएंगे।

 UPSC से स्टेट/राज्य लेवल परीक्षा से भी जुड़ी होती है जिसके चलते अभ्यर्थी राज्य सरकार द्वारा गठित परीक्षा को भी टारगेट करते हैं।

  ध्यान रखें कि upsc और राज्य पीएससी में काफ़ी अंतर होता है जिसके चलते यह नहीं कहा जा सकता कि यदि यूपीएससी छात्र upsc में उत्तीर्ण नहीं होता तो वह राजकीय परीक्षा में उत्तीर्ण होगा।

राज्य पीएससी/state psc के सिर्फ कुछ हद तक सब्जेक्ट को कम मात्रा में दिया जाता है अर्थात सरल भाषा में कहा जाए तो इसका सिलेबस कुछ हद तक कम होता है लेकिन दोनों के क्वेश्चन पेपर का प्रकार लगभग बराबर ही होता है या समान होता है।

 इसलिए यह कहना संभव नहीं है कि दोनों परीक्षाओं में से प्रश्न पत्र के मामले में कोई सरल है इसके अलावा राज्य सरकार से जुड़ी अनेक नौकरियां ऐसी होती हैं जो upsc के सिलेबस को क्रॉस करती हैं।

 

यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन और सुप्रीम कोर्ट के आधार पर चलती है। भारत सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश होते हैं upsc में कोई बदलाव किया जाता है तो यह तीन स्तर से होकर सुरक्षित होता है।

 छात्रों द्वारा कई बार upsc परीक्षा से संबंधित कुछ बदलाव की मांग की गई है तथा हिंदी माध्यम के छात्रों ने इसका काफी समर्थन भी किया था पर upsc इस बारे में भारत सरकार की समुदायक मीटिंग के दौरान यह निर्णय लिया कि इसमें कुछ बदलाव हो सकेंगे और इसी के चलते यह केस सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया जिसकी वजह से अस्थाई रूप से रुका हुआ है।

Upsc full form - final word


दोस्तो मेने इस आर्टिकल में आपको upsc full form के बारे में पूरी जानकारी दे दी है, अगर आपको ये जानकारी अछि लगती है तो आप इस जानकारी/पोस्ट को दूसरों के साथ शेयर करे, आप हमें कमेंट भी कर सकते है।